निज भाषा उन्नति अहै, सब भाषा को मूल, बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटै न हिय को शूल ।

इंसान का व्याकरण

भगवान ने कितनी प्यारी दुनिया बनायी थी,

वो पहाड़,वो चिड़िया, वो नदियाँ बनायी थी,

वो सोचा इन चीजों को संजोएगा कौन,

तब जाकर इंसानों की प्यारी दुनिया बनायी थी,  

वो बनाया उसका मकसद बडा ही निराला था,

उसकी दुनिया में वो राम,वो रहीम और वो ग्वाला था,

ये सब गये, वो युग भी ले गये,

तब खुदा का वास्तविक इंसान से पड़ा पाला था,  

उसने तो सबके जन्म की विधा भी एक बनायी थी,

अपना प्रतिबिम्ब डाल उसने प्यारी माँ बनायी थी,

उसके मन में धर्म का विचार भी न आया था,

इंसान ने भगवान को भी जाति की माला पहनायी थी,  

किसी को उसने हिन्दू का रखवाला बता दिया,

किसी को मुस्लिम भाई का अल्लाह बता दिया,

कुछ को सिक्ख ,इसाई और धर्मो में बाँटकर,

उस एक खुदा को अलग अलग लोगों का 'निवाला' बता दिया,

 

-धर्मेन्द्र कश्यप,

दस्तक कैरियर कोचिंग

संपर्क करें

सुदीप सैनी
सचिव सह वरिष्ठ प्रबन्धक, बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय, मुजफ्फरपुर
ईमेल : tolicmuzaffarpur@gmail.com
फोन : +91 621 2217622,
मोबाइल  +91 8809901139,9646497115