निज भाषा उन्नति अहै, सब भाषा को मूल, बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटै न हिय को शूल ।

यही सच है....

जीना मरना हुआ बराबर

इतना मुश्किल जीवन बना!

माना कि बाधाएं अनगिनत

लेकिन हमने इसी को चुना!!

भूखे पेट चाहे भरा पेट

हो हमारे लिए नहीं कोई अंतर!

सुख आए नहीं कि चले गए

यही सिलसिला रहा निरंतर!!

जीत हार का कोई अर्थ नहीं

धोखा हमें दोनों ने ही दिया!

मर्जी हमारी कभी चली नहीं

मनमाना सबने बर्ताव किया!!

आना-जाना पाना या खोना

भेद कौन इनमें कहता है!

जो नहीं बोले अधिकार हेतु

बस घाटे में वह सदा रहता है!!

शिक्षा अशिक्षा व्यर्थ मायने

काग खा रहे यहां पर मोती!

ठग भोगते सब विलास खूब

प्रतिभावान मंदिर मांगें मनौती!!

ईमानदारी हवा हुई यहां पर

बेईमानी का राज है सर्वत्र!

धोखेबाजों की लूट चहुंदिशि छल;

कपट बाहर व भीतर!!

दिखावे के सब फंसे हैं चक्र आपाधापी;

कपट; मारामारी!

स्वार्थ में बस करीब आते हैं

धोखे की मैत्री धोखे की यारी!!

 

आचार्य शीलक राम 9813013065 8901013065

संपर्क करें

सुदीप सैनी
सचिव सह वरिष्ठ प्रबन्धक, बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय, मुजफ्फरपुर
ईमेल : tolicmuzaffarpur@gmail.com
फोन : +91 621 2217622,
मोबाइल  +91 8809901139,9646497115